शुजालपुर में पिछले साल की तुलना में इस साल हुई अच्छी बारिश
जून की शुरुआत से अब तक हुई वर्षा के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2026 में मानसून ने अच्छी शुरुआत की

राष्ट्र आजकल प्रतिनिधि,शाजापुर। इस बार मानसून ने पिछले वर्ष की तुलना में जिले पर कहीं अधिक मेहरबानी दिखाई है। जून की शुरुआत से अब तक हुई वर्षा के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2026 में मानसून ने अच्छी शुरुआत की है। भू-अभिलेख शाखा की रिपोर्ट के अनुसार जिले में एक जून से 7 जुलाई तक औसतन 213 मिमी वर्षा दर्ज की गई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में केवल 96 मिमी वर्षा हुई थी। यानी इस बार मानसून ने पिछले साल की तुलना में दोगुने से भी अधिक वर्षा हुई है। सोमवार सुबह 8 बजे तक के 24 घंटों में जिले में औसतन 18.8 मिमी वर्षा दर्ज की गई। सबसे अधिक 38 मिमी वर्षा गुलाना तहसील में हुई। इसके अलावा शाजापुर में 26 मिमी, मोमन बड़ोदिया में 28 मिमी, पोलायकलां में 18 मिमी, अकोदिया बड़ोदिया में 18 मिमी, कालापीपल में 3 मिमी और शुजालपुर में 1 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई।
तहसीलवार आंकड़ों पर नजर डालें तो अब तक पोलायकलां में सर्वाधिक 257.5 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। वहीं शुजालपुर में 217 मिमी, मोमन बड़ोदिया में 212 मिमी, शाजापुर एवं कालापीपल में 205-205 मिमी, अकोदिया बड़ोदिया में 204 मिमी तथा गुलाना में 194 मिमी वर्षा हो चुकी है। जिले की सामान्य वार्षिक वर्षा 987.7 मिमी मानी जाती है। पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर वर्षा से तालाबों, कुओं और जलाशयों में जलस्तर बढ़ने लगा है।पार्वती और कालीसिंध नदी में तेज धारा बहने लगी है। किसानों को भी खरीफ सीजन के लिए पर्याप्त नमी मिलने से राहत मिली है। मौसम विभाग ने आगामी दिनों में भी अच्छी वर्षा की संभावना जताई है, जिससे जिले के वर्षा आंकड़ों में और बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
हालांकि मानसून की यह मेहरबानी किसानों के लिए पूरी तरह राहत लेकर नहीं आई है। कई क्षेत्रों में लगातार वर्षा के कारण खेतों में जलभराव की स्थिति बन गई है। इससे सोयाबीन की फसल प्रभावित होने लगी है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगामी दिनों में मौसम संतुलित रहा तो फसलों को इसका लाभ मिलेगा, लेकिन अत्यधिक वर्षा जारी रही तो नुकसान बढ़ सकता है। जिले के कई हिस्सों में लगातार हो रही वर्षा ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में पानी भरने और ठीक से सोयाबीन के बीजों का अंकुरण नहीं होने से फसल प्रभावित हुई है। कई स्थानों पर बीज मिट्टी में ही सड़ गए हैं, जबकि जहां अंकुरण हुआ है वहां भी पौधों पर जलभराव का असर दिखाई देने लगा है। किसानों और कृषि जानकारों के अनुसार शुरुआती स्तर पर करीब 50 प्रतिशत तक बोवनी प्रभावित होने की आशंका है। गुलाना क्षेत्र सहित कई गांवों में किसानों को दोबारा बुवाई करनी पड़ रही है। महंगे बीज खरीदने के बाद भी अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने से किसानों की आर्थिक चिंता बढ़ गई है। यदि मौसम जल्द साफ नहीं हुआ तो नुकसान और बढ़ सकता है।





