सरकार ने बदले दवा खरीद के नियम; सिरप अब डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन पर ही मिलेगा

कफ सिरप अब बिना डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के नहीं खरीदे जा सकेंगे। केंद्र सरकार ने ड्रग्स नियमों में बदलाव किया है। इसके तहत सिरप को अब उस लिस्ट से हटा दिया गया है, जिसमें दवाएं सीधे दुकान से खरीदी जा सकती हैं।
सरकार का कहना है कि इससे सिरप आधारित दवाओं पर निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण मजबूत होगा। साथ ही सिरप निर्माता और विक्रेता को लाइसेंसिंग और क्वालिटी कंट्रोल से जुड़े सख्त नियमों का पालन करना ही होगा।
मध्य प्रदेश में अक्टूबर 2025 में दूषित सिरप से 26 बच्चों की मौत हो गई थी।
नई व्यवस्था के तहत ड्रग्स रूल्स, 1945 की अनुसूची K में बदलाव किया गया है। इस अनुसूची में उन दवाओं को रखा गया था, जिन्हें कुछ नियमों में छूट दी गई थी। अब इस सूची से सिरप को हटा लिया गया है।
आम लोगों से सुझाव और आपत्तियां मांगी थीं
मंत्रालय ने बताया कि इस बदलाव से पहले 29 दिसंबर 2025 को मसौदा अधिसूचना जारी कर आम लोगों और संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियां मांगी गई थीं।
सरकार ने कहा कि नियमों में संशोधन से पहले देश की सर्वोच्च वैधानिक तकनीकी सलाहकार संस्था Drugs Technical Advisory Board (DTAB) से परामर्श किया गया था। केंद्र सरकार ने ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 की धारा 12 और 33 के तहत प्राप्त अधिकारों का उपयोग करते हुए यह बदलाव किया था।
ड्रग्स रूल्स, 1945, ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत बनाए गए हैं। ये नियम भारत में दवाओं के निर्माण, बिक्री और वितरण को नियंत्रित करते हैं।
तीन साल पहले क्वालिटी टेस्ट अनिवार्य किया था
दवा सुरक्षा और गुणवत्ता को लेकर केंद्र सरकार पिछले कुछ वर्षों में कई कदम उठा चुकी है। 2022-23 में भारत में बनी कुछ कफ सिरप दवाओं को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठे थे। अफ्रीकी देशों और उज्बेकिस्तान में बच्चों की मौत के मामलों के बाद भारतीय दवाओं की गुणवत्ता पर निगरानी बढ़ाई गई थी।
इसके बाद सरकार ने कफ सिरप के निर्यात से पहले सरकारी लैब में अनिवार्य परीक्षण की व्यवस्था लागू की। साथ ही दवा निर्माण इकाइयों के लिए गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (GMP) मानकों को भी सख्त किया गया। कई कंपनियों के लाइसेंस निलंबित किए गए और उत्पादन इकाइयों पर कार्रवाई हुई।





