आइए जानें क्यों किलों के चारों ओर गहरी और चौड़ी खाई बनाई जाती थी
किलों के बाहर बनी ये खाइयां काफी अहम हुआ करती थीं

राष्ट्र आजकल प्रतिनिधि। प्राचीन किलों के चारों ओर गहरी और चौड़ी खाइयां दुश्मनों को सीधे किले तक पहुंचने से रोकने और सुरंगों को नाकाम करने के लिए बनाई जाती थीं।अगर आप प्राचीन किलों को देखें, तो उन सभी में एक चीज काफी कॉमन नजर आएगी और वो है किली की ऊंची-ऊंची दीवारों के ठीक बाहर बनी एक गहरी और चौड़ी खाई। आज भले ही ये खाइयां सूखी हुई हैं या इनमें पेड़-पौधे उग गए हैं, लेकिन उस समय में ये किले की रक्षा की पहली दीवार हुआ करती थी। जी हां, सुरक्षा के लिहाज से किलों के बाहर बनी ये खाइयां काफी अहम हुआ करती थीं। हालांकि, इसका मकसद सिर्फ दुश्मन को रोकना नहीं था, बल्कि और भी कारण थे। आइए जानें क्यों किलों के चारों ओर गहरी और चौड़ी खाई बनाई जाती थी
किलों के बाहर खाई बनाने का सबसे पहला मकसद दुश्मन को सीधे किले तक पहुंचने से रोकना। इस खाई के कारण दुश्मन के सैनिक घुड़सवार या हाथी किले के मुख्य दरवाजे तक सीधे नहीं पहुंच पाते थे और न ही दीवार पर चढ़कर किले के अंदर दाखिल हो पाते थे। इसलिए अगर कोई दुश्मन सेना आक्रमण कर दे, तो उन्हें रुकना ही पड़ता था, जिससे किले के अंदर मौजूद सैनिकों को जवाबी हमले का समय मिल जाता था। पुराने समय में किसी किले को गिराने के लिए दुश्मन जमीन के नीचे सुरंग खोदने की तकनीक अपनाते थे, लेकिन अगर किले के चारों ओर पानी भरी खाई होगी, तो सुरंग खोदना मुश्किल है। इससे किले की सुरक्षा बनी रहती और दुश्मन की साजिश नाकाम हो जाती थी। उस समय किलों के दरवाजों को तोड़ने के लिए पेड़ के तनों से बने भारी हथियारों या हाथियों का इस्तेमाल किया जाता था या। किले के चारों और बनी खाई इस तकनीक को नाकाम कर देती थी। खाई के कारण हथियार या हाथी को किले के दरवाजे तक सीधा लाना नामुमकिन हो जाता था। किले की खाई खाली नहीं होती थी।
उसमें पानी होता था और सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए उसमें मगरमछ या जहरीले सांप छोड़ दिए जाते थे, ताकि कोई तैरकर उसे पार न कर सके। अगर कोई उस खाई को तैरकर पार करने की कोशिश करता, तो जीवों का खाना बन सकता था। इससे किले की सुरक्षा और मजबूत हो जाती थी। किले के चारों ओर पानी भरी गहरी खाई होती थी। इसलिए किले के अंदर या बाहर जाने के लिए ड्रॉब्रिज यानी उठने वाले पुल का इस्तेमाल किया जाता था। ये भारी लकड़ी या लोहे के पुल होते थे, जिन्हें इस खाई के ऊपर बिछाया जाता था, ताकि लोग अंदर और बाहर जा सकें। रात के समय या युद्ध के समय इस पुल को बड़ी-बड़ी जंजीरों की मदद से खींच लिया जाता था और किले का दरवाजा बंद हो जाता था।





