
राष्ट्र आजकल प्रतिनिधि, भोपाल। राजधानी भोपाल की जीवनरेखा माने जाने वाले बड़े तालाब (भोज वेटलैंड) पर इस बार कमजोर मानसून का असर साफ दिखाई दे रहा है। भोपाल और इसके प्रमुख कैचमेंट क्षेत्र सीहोर में पिछले वर्ष की तुलना में कम वर्षा होने के कारण तालाब का जलस्तर अपेक्षित गति से नहीं बढ़ पा रहा है। रविवार को बड़े तालाब का जलस्तर 1659.70 फीट दर्ज किया गया, जबकि इसका फुल टैंक लेवल (एफटीएल) 1666.80 फीट है। इस तरह तालाब अभी भी अपने पूर्ण जलभराव स्तर से 7.10 फीट नीचे है।
20 जुलाई को बड़े तालाब का जलस्तर 1659.50 फीट दर्ज किया गया था। इसके बाद कई दौर की बारिश हुई, लेकिन जलस्तर में केवल 0.20 फीट की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह स्थिति बताती है कि इस बार मानसून का प्रभाव तालाब के जलभराव पर अपेक्षित रूप से नहीं पड़ सका। यदि पिछले वर्ष से तुलना करें तो एक अगस्त को बड़े तालाब का जलस्तर 1664.30 फीट था। यानी इस वर्ष जलस्तर पिछले साल की तुलना में 4.60 फीट कम है। यह अंतर सीधे तौर पर कम बारिश का परिणाम माना जा रहा है।
बारिश के आंकड़े भी इसी स्थिति की पुष्टि करते हैं। पिछले वर्ष एक अगस्त तक भोपाल में 26.25 इंच और सीहोर में 25.4 इंच वर्षा दर्ज की गई थी। वहीं इस वर्ष दो अगस्त तक भोपाल में केवल 18.98 इंच और सीहोर में 20.6 इंच बारिश हुई है। यानी भोपाल में लगभग 7.3 इंच और सीहोर में 4.8 इंच कम वर्षा रिकॉर्ड की गई। बड़ा तालाब केवल प्राकृतिक जलाशय नहीं, बल्कि भोपाल की जलापूर्ति व्यवस्था का प्रमुख आधार भी है। नगर निगम इसी तालाब से पुराने भोपाल, संत हिरदाराम नगर (बैरागढ़) और आसपास के क्षेत्रों की तीन लाख से अधिक आबादी को प्रतिदिन पेयजल उपलब्ध कराता है। इसके अलावा यह तालाब शहर के भूजल स्तर को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में मानसून के दौरान भी तालाब का जलस्तर एफटीएल से 7.10 फीट नीचे बने रहना भविष्य की जलापूर्ति और जल संरक्षण, दोनों के लिहाज से चिंता का विषय माना जा रहा है।





