लाड़ली बहना योजना पर बड़ा अपडेट…
महिलाओं की आर्थिक स्थिति पर फोकस, शिक्षा और स्वास्थ्य का होगा आकलन

राष्ट्र आजकल प्रतिनिधि, इंदौर। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना को शुरू हुए दो वर्ष पूरे होने के बाद अब मध्य प्रदेश सरकार इसके वास्तविक प्रभाव का आकलन कराने जा रही है। अब तक योजना को लेकर सबसे अधिक चर्चा हर महीने मिलने वाली आर्थिक सहायता और लाभार्थी महिलाओं की संख्या को लेकर होती रही है, लेकिन पहली बार यह जानने की कोशिश होगी कि इस योजना ने महिलाओं के जीवन में कितना सामाजिक और आर्थिक बदलाव किया है।इसके लिए अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान से योजना का विस्तृत सामाजिक-आर्थिक अध्ययन कराया जाएगा। अध्ययन में यह पता लगाया जाएगा कि योजना के तहत मिलने वाली राशि महिलाओं द्वारा किन जरूरतों पर खर्च की जा रही है, उनकी आर्थिक स्थिति में कितना सुधार आया है और इसका परिवार पर क्या प्रभाव पड़ा है।
यह अध्ययन केवल इस बात तक सीमित नहीं रहेगा कि योजना की राशि लाभार्थियों के खातों तक पहुंच रही है या नहीं। इसके तहत यह भी देखा जाएगा कि नियमित आर्थिक सहायता से महिलाओं की आर्थिक स्थिति में कितना सुधार हुआ, बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च में क्या बदलाव आया, स्वरोजगार के अवसर बढ़े या नहीं और घरेलू वित्तीय निर्णयों में उनकी भागीदारी कितनी मजबूत हुई। इसके अलावा अध्ययन में उन पात्र महिलाओं की भी पहचान की जाएगी, जो किसी कारणवश अभी तक योजना का लाभ नहीं ले पा रही हैं। हाल ही में प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद ने महाराष्ट्र की मुख्यमंत्री माझी लाड़की बहीण योजना और ओडिशा की सुभद्रा योजना का देश का पहला वैज्ञानिक प्रभाव अध्ययन प्रकाशित किया है। इस अध्ययन में वास्तविक बैंकिंग लेनदेन के आधार पर यह विश्लेषण किया गया कि प्रत्यक्ष नकद सहायता का महिलाओं के जीवन पर क्या असर पड़ा।
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025-26 तक देश के 15 से अधिक राज्यों में महिलाओं के लिए प्रत्यक्ष नकद सहायता (डीबीटी) योजनाएं संचालित हो रही हैं। इन योजनाओं से करीब 12 करोड़ महिलाएं जुड़ी हुई हैं, जबकि राज्यों का कुल वार्षिक व्यय लगभग 1.7 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अब केवल आर्थिक सहायता देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह मापना भी जरूरी है कि इन योजनाओं ने महिलाओं के जीवन में कितना वास्तविक बदलाव किया है।





