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बच्चों को जन्म देने के बाद महिला हो रही पोस्टपार्टम डिप्रेशन के शिकार

बेबी ब्लूज आमतौर पर कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं, जबकि पोस्टपार्टम डिप्रेशन के लक्षण हफ्तों या महीनों तक बने रह सकते हैं

राष्ट्र आजकल प्रतिनिधि । अगर आपके घर में भी किसी महिला ने बच्चे को जन्म दिया है, तो ऐसी महिला का खास ध्यान रखें। ताकि वो पोस्टपार्टम डिप्रेशन का शिकार न होने पाएं। बच्चे का जन्म किसी भी परिवार के लिए खुशी का पल होता है, लेकिन मां के लिए यह समय शारीरिक और मानसिक दोनों तरह के बड़े बदलावों से भरा होता है। डिलीवरी के बाद हार्मोन में बदलाव, नींद की कमी, थकान और नवजात की देखभाल की जिम्मेदारी कई महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। कुछ महिलाओं को शुरुआती दिनों में हल्का मूड स्विंग या उदासी महसूस होती है, जिसे सामान्य माना जाता है। लेकिन यदि उदासी, चिंता, निराशा या तनाव लंबे समय तक बना रहे और रोजमर्रा की जिंदगी पर असर डालने लगे, तो यह पोस्टपार्टम डिप्रेशन का संकेत हो सकता है। समय रहते इसके लक्षणों को पहचानना और उचित इलाज कराना बेहद जरूरी है।

परिवार का सहयोग, भावनात्मक समर्थन और डॉक्टर से समय पर सलाह नई मां को इस स्थिति से बाहर निकलने में मदद कर सकती है। आइए जानते हैं पोस्टपार्टम डिप्रेशन के गंभीर लक्षण और इससे बचाव के उपाय। पोस्टपार्टम डिप्रेशन (PPD) एक मानसिक स्वास्थ्य स्थिति है, जो बच्चे के जन्म के बाद कुछ महिलाओं में विकसित हो सकती है। यह सामान्य “बेबी ब्लूज” से अलग होता है। बेबी ब्लूज आमतौर पर कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं, जबकि पोस्टपार्टम डिप्रेशन के लक्षण हफ्तों या महीनों तक बने रह सकते हैं और इलाज की जरूरत पड़ सकती है।अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं।

लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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