एमपी हाई कोर्ट का सरकार से बड़ा सवाल
नौकरी के बाद तीसरा बच्चा होने पर क्या बदलेगा नियम?

ग्वालियर।अवैध खनन से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान मंगलवार को हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में खनन अधिकारी के तीसरे बच्चे का भी मामला उठा। ग्वालियर में पदस्थ खनिज अधिकारी पंकजध्वज मिश्रा के तीन बच्चों का मामला सामने आने पर कोर्ट ने राज्य सरकार के अधिवक्ता से सवाल किया कि यदि नियुक्ति के समय दो बच्चों की शर्त लागू है, तो नौकरी मिलने के बाद तीसरा बच्चा होने पर क्या नियम लागू नहीं रहेगा?
इस पर सरकारी वकील तत्काल स्पष्ट जवाब नहीं दे सके और जवाब के लिए समय मांगा। कोर्ट ने राज्य सरकार को दो सप्ताह में नियम की स्पष्ट व्याख्या पेश करने के निर्देश दिए हैं।इसी सुनवाई में कोर्ट ने अवैध खनन से जुड़े मामले में अशोक यादव की तीन खदानों पर लगी रोक भी अगले आदेश तक बरकरार रखी और पिछले पांच वर्षों में अवैध खनन के मामलों में दर्ज एफआइआर का रिकॉर्ड तलब किया।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि सेवा नियमों के अनुसार सरकारी नौकरी के अभ्यर्थी के दो से अधिक बच्चे नहीं होने चाहिए। इस पर कोर्ट ने सवाल किया कि क्या यह शर्त केवल नियुक्ति के समय लागू होती है या सेवा में आने के बाद भी कर्मचारी के लिए प्रभावी रहती है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि यदि नौकरी मिलने के बाद तीसरा बच्चा होने पर नियम का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है तो दो बच्चों की सीमा तय करने का उद्देश्य ही विफल हो जाएगा। राज्य सरकार के अधिवक्ता इस सवाल पर तत्काल स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। उन्होंने जवाब देने के लिए समय मांगा, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। मामला ग्वालियर में पदस्थ खनिज अधिकारी पंकजध्वज मिश्रा से जुड़ा है। उन्हें भी तीसरे बच्चे के संबंध में अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया है।





