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क्यों माता-पिता जिम्मेदार बच्चे से ज्यादा लापरवाह पर लुटाते हैं प्यार?

क्या माता-पिता जानबूझकर करते हैं बच्चों में फर्क?

राष्ट्र आजकल प्रतिनिधि | परिवारों में अक्सर एक शिकायत सुनने को मिलती है कि जो बच्चा माता-पिता की दिन-रात फिक्र करता है, उसकी बजाय उस भाई या बहन को ज्यादा लाड़-प्यार मिलता है जो अपनी जिम्मेदारियों से भागता है। जी हां, यह बात आपको भले ही कड़वी और भेदभाव से भरी लगे, लेकिन रिसर्च बताती है कि यह बिल्कुल सच है। असल में, माता-पिता अपने होनहार और आत्मनिर्भर बच्चे को लेकर मन ही मन इतने बेफिक्र होते हैं कि उनका ध्यान खुद-ब-खुद उस बच्चे की ओर चला जाता है जो अपनी लाइफ में स्ट्रगल कर रहा होता है। यह सब अनजाने में होता है। विज्ञान की भाषा में इसे ‘कम्पेंसेटरी पेरेंटिंग’ कहा जाता है।

भले ही माता-पिता का इरादा गलत न हो, लेकिन इसका बच्चों के मनोविज्ञान पर गहरा असर पड़ता है। ‘जर्नल ऑफ मैरिज एंड फैमिली’ की एक स्टडी के अनुसार, जब घर में किसी एक बच्चे पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है, तो इससे कई चीजें प्रभावित होती हैं इसे फेस्टिंगर की ‘सोशल कंपैरिजन थ्योरी’ से बहुत आसानी से समझा जा सकता है। यह थ्योरी बताती है कि इंसान अपनी वैल्यू अकेले में तय नहीं करता, बल्कि आस-पास के लोगों से तुलना करके करता है। जब बच्चे देखते हैं कि उनके भाई-बहन को ज्यादा अहमियत मिल रही है, तो उनकी पहचान और भावनात्मक विकास पर इसका गहरा असर पड़ता है। नतीजा यह होता है कि कम तवज्जो पाने वाला बच्चा अपने अंदर एक गहरी नाराजगी पाल लेता है, जो बड़े होने तक उसके मन में रह सकती है। हालांकि, यह भी सच है कि एक ही घर में पले-बढ़े भाई-बहन माता-पिता के एक ही बर्ताव को बिल्कुल अलग-अलग नजरिए से देख सकते हैं। अगर माता-पिता बच्चों को साफ-साफ बता दें कि वे किसी एक बच्चे के साथ थोड़ा अलग व्यवहार क्यों कर रहे हैं, तो बच्चे उस बात को बहुत आसानी से समझ जाते हैं। जब बच्चों को लगता है कि उनकी बात सुनी जा रही है और उनकी अहमियत समझी जा रही है, तो उनके मन में कोई कड़वाहट नहीं रहती।

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