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पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का निधन:रायपुर एम्स में अंतिम सांस ली, 13 की उम्र में पहली बार मंच पर आईं

छत्तीसगढ़ की लोक कला और पंडवानी गायन को वैश्विक पहचान दिलाने वाली पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का निधन हो गया। वे 70 साल की थीं। उन्होंने शनिवार रात 3.15 बजे रायपुर एम्स में अंतिम सांस ली। वे पिछले कुछ समय से बीमार थीं।

तीजन बाई ने अपनी सशक्त आवाज, प्रभावशाली अभिनय और अनोखी प्रस्तुति शैली सेपंडवानी को देश ही नहीं, बल्कि विदेशों तक नई पहचान दिलाई। महाभारत की कथाओं को मंच पर जीवंत करने की उनकी कला ने उन्हें भारतीय लोक संस्कृति की सबसे प्रतिष्ठित कलाकारों में शामिल किया।

भारतीय लोक कला में उनके असाधारण योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण और देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था।

तीजन बाई के स्वास्थ्य की जानकारी खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ली थी। 1 नवंबर 2025 को प्रधानमंत्री मोदी ने तीजन बाई की बहू वेणू देशमुख को फोन लगाकर उनका हालचाल पूछा था। बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने चिंता जताई और हरसंभव मदद का आश्वासन दिया था।

फोन पर नरेंद्र मोदी ने सबसे पहले अपना परिचय देते हुए कहा- नमस्कार वेणू जी, मैं देश का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बोल रहा हूं। तीजन बाई जी की तबीयत कैसी है? वेणू देशमुख ने बताया कि ‘मम्मी की तबीयत इन दिनों ठीक नहीं है, वे काफी कमजोर हो गई हैं।’ इस पर प्रधानमंत्री ने अफसोस जताते हुए कहा था कि उनका ध्यान रखिए, और अगर किसी भी चीज की जरूरत हो तो सीधे मुझसे संपर्क कीजिए।

वेणू देशमुख ने बताया था कि प्रधानमंत्री ने तीजन बाई के स्वास्थ्य को लेकर गंभीरता दिखाई और कहा कि देश के लिए उन्होंने जो योगदान दिया है, वह अमूल्य है। तीजन बाई जी छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परंपरा की धरोहर हैं।

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