सनातन धर्म का सबसे बड़ा त्योहार; कल और परसों, दोनों दिन है अमावस्या फिर क्यों मना रहे 8 नवंबर को ही दिवाली?

महापर्व दिवाली, सनातन धर्म का सबसे बड़ा त्योहार है। इस दिन धन की देवी मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। शाम को घरों में दीप जलाए जाते हैं। मान्यता है कि दिवाली पर पूर्ण आस्था से लक्ष्मीजी की पूजा करने से वे प्रसन्न होती हैं जिससे जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली बढ़ती है। दिवाली का त्योहार कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। इस बार यह तिथि लगातार दो दिन 8 और 9 नवंबर को पड़ रही है जिससे दिवाली को लेकर कुछ भ्रम फैल रहा है। अधिकांश धर्माचार्यों, ज्योतिषाचार्यों ने 8 तारीख को ही दिवाली मनाने को उचित बताया है। दरअसल इस पर्व पर प्रदोष काल का भी महत्व माना जाता है।
दीपावली के पर्व पर महालक्ष्मी और भगवान गणेश के पूजन का सबसे ज्यादा महत्व है। ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि इस दिन घरों में भगवान गणेश व माता महालक्ष्मी का विधि विधान से पूजन कर सुख- समृद्धि की कामना करनी चाहिए। घरों के आंगन में रंगोली सजाकर, देहरी पर देशी घी के दीप रखना चाहिए और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में भी विशेष रूप से पूजा- अर्चना करनी चाहिए।
8 नवंबर को क्यों मना रहे दिवाली
दिवाली कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है। पंचांग के अनुसार, इस साल अमावस्या 8 नवंबर को सुबह 11.26 बजे शुरू होगी और 9 नवंबर को मध्यान्ह 12.31 बजे तक रहेगी। पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि शास्त्रों के अनुसार दिवाली के लिए तिथि के साथ ही प्रदोष काल भी विचारणीय होता है। अमावस्या तिथि रात में 8 नवंबर को ही व्याप्त रहेगी इसी वजह से रविवार को ही दीपावली मनाना उचित रहेगा।





