चादरों का घेरा बनाकर प्लेटफॉर्म पर ही कराया सुरक्षित प्रसव, बच्चे के रोने की आवाज सुन रो पड़े परिजन
चलती ट्रेन में मची चीख-पुकार, प्लेटफॉर्म पर ट्रेन रुकते ही डॉक्टरों और आरपीएफ ने संभाला मोर्चा

राष्ट्र आजकल प्रतिनिधि, सागर/बीना। कहते हैं कि जाको राखे साइयां, मार सके न कोय… और जब संकट के समय इंसानियत फरिश्ता बनकर सामने आ जाए, तो हर मुश्किल आसान हो जाती है। शुक्रवार को दादर-गोरखपुर स्पेशल एक्सप्रेस (01027) में सफर कर रहे एक परिवार के साथ कुछ ऐसा ही हुआ। ट्रेन की रफ्तार के साथ एक गर्भवती मां की सांसें भी तेजी से चल रही थीं। अस्पताल कोसों दूर था और प्रसव का समय बेहद नजदीक। ऐसे में बीना रेलवे स्टेशन का प्लेटफॉर्म नंबर-5 ही ‘डिलीवरी रूम’ बन गया और रेलवे की सूझबूझ से एक नई जिंदगी ने इस दुनिया में कदम रखा।
मूल रूप से गोरखपुर (संत कबीर नगर) के रहने वाले जितेंद्र कुमार पुणे की एक निजी कंपनी में काम करते हैं। वह अपनी 33 वर्षीय गर्भवती पत्नी किरण को लेकर ट्रेन के बी-3 कोच में सफर कर रहे थे। किरण को गर्भावस्था का 8वां महीना चल रहा था और सब कुछ सामान्य था लेकिन जैसे ही ट्रेन बीना स्टेशन से करीब 15 मिनट की दूरी पर थी, किरण को अचानक असहनीय लेबर पेन (प्रसव पीड़ा) शुरू हो गया। चलती ट्रेन में पत्नी की हालत देख जितेंद्र और उनके साथ यात्रा कर रहे दोस्त भीष्म नारायण के हाथ-पैर फूल गए। आनन-फानन में रेलवे के हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क किया गया। जैसे ही यह खबर बीना स्टेशन के कंट्रोल रूम तक पहुंची, वहां हड़कंप मच गया।किरण की हालत इतनी नाजुक हो चुकी थी कि उसे स्टेशन से बाहर अस्पताल ले जाने तक का वक्त नहीं था। डॉक्टरों ने तुरंत फैसला लिया और महिला को बेहद सावधानी से ट्रेन से उतारकर प्लेटफॉर्म पर ही लिटाया गया। प्लेटफॉर्म पर मौजूद महिला पुलिसकर्मियों और सहयात्रियों ने तुरंत चादरों और साड़ियों का एक सुरक्षा घेरा (पर्दा) बनाया। डॉ. राधिका और महिला आरक्षकों की देखरेख में प्लेटफॉर्म पर ही प्रसव प्रक्रिया शुरू कराई गई। स्टेशन पर मौजूद सैकड़ों यात्री अपनी सांसें रोके ईश्वर से प्रार्थना कर रहे थे।





