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ओंकारेश्वर में 108 फीट ऊंची ‘स्टैच्यू आफ वैलनेस’ की गुणवत्ता पर उठे सवाल

अंतरराष्ट्रीय मानकों का हुआ पालन, काल्पनिक डाटा के आधार पर की गई गणना।

राष्ट्र आजकल प्रतिनिधि भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी एकात्मधाम परियोजना में ओंकारेश्वर में नर्मदा नदी के किनारे आदि गुरु शंकराचार्य की 108 फीट ऊंची प्रतिमा ‘स्टैच्यू आफ वैलनेस’ की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए शिकायत की गई है। इसपर लोकायुक्त पुलिस की इंदौर इकाई जांच कर रही है। यह शिकायत इस परियोजना से जुड़े तत्कालीन फील्ड डायरेक्टर विश्वजीत बनर्जी ने सीबीआई में शिकायत की थी। उनके अनुसार, प्रतिमा 120 किलोमीटर प्रति घंटे की हवा का दबाव नहीं झेल सकती है।

पिलर का जो स्ट्रक्चर है उस पर दबाव अधिक पड़ रहा है। वह झुक गया है। वहीं, ऐसे आरोप को परियोजना को देख रहे राज्य पर्यटन विकास निगम ने सिरे से खारिज करते हुए दावा किया कि निर्माण में अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन हुआ है। काल्पनिक डाटा के आधार पर की दबाव की गणना की गई है।

पिलर पर दबाव अधिक पड़ रहा है, जो प्रतिमा के लिए नुकसानदेह है। उन्होंने अपने दावे के पुष्टि के लिए शिकायत के साथ इंटरनेशनल स्ट्रक्चरल एनालिसिस साफ्टवेयर की रिपोर्ट को नत्थी किया, जिसमें मुख्य आंतरिक पिलर पर दवाब अनुपात 24 प्रतिशत अधिक बताया गया।

एलएंडटी से कराया गया निर्माण उधर, पर्यटन विकास निगम की ओर से आरोप को सिरे से खारिज करते हुए दावा किया कि विश्व की सबसे ऊंची 598 फीट की सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा का निर्माण करने वाली एजेंसी एलएंडटी से निर्माण कराया गया है। निर्माण में आइआइटी चैन्नई और दिल्ली से परामर्श लिया गया।प्रतिमा की अभिकल्पना अवधि IIT दिल्ली ने पांच सौ या उससे अधिक वर्ष अनुमानित की गई है। वायु दबाव की गणना ओंकारेश्वर के लिए निर्धारित वायु दबाव 140 किलोमीटर प्रतिघंटे के स्थान पर 169 किलोमीटर प्रतिघंटे के हिसाब से की गई है। 24 प्रतिशत दबाव की गणना भी पूरी तरह असत्य है। प्रतिमा का पिलर कहीं से भी नहीं झुका है।

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