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ऑपरेशन सिंदूर के बाद कश्मीर में एडवांस हथियारों वाली 1500 विलेज गार्ड्स की फौज तैनात; ग्रामीण जवानों के साथ 12-12 घंटे की ड्यूटी कर रहे

ऑपरेशन सिंदूर के बाद जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियों ने गांव स्तर पर सुरक्षा तंत्र काफी मजबूत किया है। पिछलेे एक साल में पांच जिलों में 1500 से ज्यादा विलेज डिफेंस गार्ड्स (वीडीजी) को ट्रेनिंग दी गई है।

इसमें हथियार चलाना, टैक्टिकल मूवमेंट, सर्विलांस व इमरजेंसी रिस्पॉन्स शामिल है। वहीं, .303 राइफल की जगह एसएलआर, बुलेटप्रूफ जैकेट व वायरलेस कम्युनिकेशन सेट भी दिए जा रहे हैं।

ये ग्रामीण सीमाई इलाकों में जवानों के साथ 12-12 घंटे की ड्यूटी कर रहे हैं। राजौरी के अमित कुमार कहते हैं कि पिछले एक साल में कई बार घुसपैठ की कोशिशें हुईं, पर वीडीजी सदस्यों ने समय रहते सेना और पुलिस को अलर्ट किया।

उनके मुताबिक गांव में कोई अजनबी आता है तो लोग तुरंत पहचानकर मूवमेंट की सूचना देते हैं। रात में सुरक्षा बलों के साथ जॉइंट पेट्रोलिंग भी होती है।

पिछले एक साल में जम्मू-कश्मीर में आतंकी घटनाओं से होने वाली मौतों में लगभग 27.5% की कमी दर्ज की गई है। जहां हमले से पहले वाले साल में कुल 127 मौतें हुई थीं, वहीं पिछले एक साल में यह आंकड़ा घटकर 92 रह गया है।

हिंसा का सबसे गहरा असर पर्यटन पर पड़ा है, जिससे पर्यटकों की सालाना संख्या 33 लाख से गिरकर 11.60 लाख रह गई है। पर्यटकों का भरोसा बहाल करने के लिए कई स्तरों पर कोशिशें की जा रही हैं।

पुलिस: 50-60% इनपुट ह्यूमन इंटेलिजेंस पर

एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक सर्च ऑपरेशन में 60% इनपुट ह्यूमन इंटेलिजेंस पर आधारित होते हैं। बॉर्डर और पहाड़ी गांवों में स्थानीय लोग और वीडीजीज सदस्य सर्विलांस की पहली परत की तरह काम करते हैं। इनकी वजह से कई आतंकी वारदात रोकने में सफलता मिली है।

अमरनाथ यात्रा: सीएपीएफ की 190 कंपनियां होंगी सुरक्षा में तैनात 3 जुलाई से शुरू होने वाले अमरनाथ यात्रा की तैयारियां के बीच चुनाव ड्यूटी के लिए दूसरे राज्यों में गईं सीएपीएफ की 190 कंपनियां जम्मू-कश्मीर लौटने लगी हैं। ये कंपनियां अगले दो हफ्ते में पहुंच जाएंगी। प्रशासन का फोकस टूरिस्ट लोकेशन और हाईवे की सुरक्षा पर है। हर कंपनी में करीब 100 जवान होते हैं।

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